सैकड़ों लोग सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को मोदी की रैली का बताते हुए शेयर कर चुके हैं
त्रिपुरा में एक सीट पर भी 18 अप्रैल को चुनाव होना था लेकिन क़ानून-व्यवस्था के कारण उसे रद्द कर दिया गया है. इस तरह दूसरे चरण में कुल 95 सीटों के लिए मतदान हो रहा है.
सभी सीटों पर हुए मतदान की गिनती सातवें चरण के मतदान के बाद 23 मई को होगी.
इससे पहले पिछले गुरुवार (11 अप्रैल) को पहले चरण में 18 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की 91 सीटों पर मतदान हुए थे.
चुनाव आयोग के अनुसार छिटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्ण रहा था. चुनाव की पूरी प्रक्रिया 39 दिनों तक चलेगी.
हालांकि इसके बावजूद यह भारत का सबसे लंबा चुनाव नहीं है. भारत का सबसे लंबा चुनाव पहला आम चुनाव था. आज़ाद भारत का पहला आम चुनाव 25 अक्तूबर 1951 को शुरू हुआ था और 21 फ़रवरी 1952 तक चला था. मतलब क़रीब तीन महीने तक चुनाव चला था.
एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ दूसरे चरण के 27 फ़ीसदी उम्मीदवारों की संपत्ति एक करोड़ रुपए या उससे अधिक मूल्य की है. 11 फ़ीसदी उम्मीदवारों की संपत्ति 5 करोड़ रुपए या उससे अधिक की है.
वहीं, 07 फ़ीसदी ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन्होंने अपनी संपत्ति दो से पांच करोड़ रुपए के बीच की बताई है. 41 फ़ीसदी ऐसे भी उम्मीदवार हैं, जिनके पास 10 लाख रुपए से कम की संपत्ति है.
दलों की बात की जाए तो कांग्रेस के 53 में से 46 उम्मीदवार करोड़पति हैं. भाजपा के 51 में से 45 उम्मीदवार, डीएमके के 24 में से 23, एआईडीएमके के 22 में से 22 और बीएसपी के 80 में से 21 उम्मीदवारों ने ख़ुद को करोड़पति घोषित किया है.
लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के उम्मीदवारों की औसतन संपत्ति 3.90 करोड़ रुपए हैं.
इन सभी में तमिलनाडु के कन्याकुमारी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार वसंत कुमार सबसे अमीर हैं. इन्होंने 417 करोड़ से अधिक की संपत्ति घोषित की है.
सबसे अमीर उम्मीदवारों की सूची में दूसरे नंबर पर बिहार के पूर्णिया से कांग्रेस उम्मीदवार उदय सिंह हैं. इन्होंने 341 करोड़ रुपए से ज़्यादा की संपत्ति की घोषणा की है.
वहीं सूची में तीसरा नाम डीके सुरेश का है, जो कर्नाटक के बेंगलुरू ग्रामीण से कांग्रेस उम्मीदवार हैं. इनके पास 338 करोड़ से अधिक की संपत्ति है.
सभी सीटों पर हुए मतदान की गिनती सातवें चरण के मतदान के बाद 23 मई को होगी.
इससे पहले पिछले गुरुवार (11 अप्रैल) को पहले चरण में 18 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की 91 सीटों पर मतदान हुए थे.
चुनाव आयोग के अनुसार छिटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्ण रहा था. चुनाव की पूरी प्रक्रिया 39 दिनों तक चलेगी.
हालांकि इसके बावजूद यह भारत का सबसे लंबा चुनाव नहीं है. भारत का सबसे लंबा चुनाव पहला आम चुनाव था. आज़ाद भारत का पहला आम चुनाव 25 अक्तूबर 1951 को शुरू हुआ था और 21 फ़रवरी 1952 तक चला था. मतलब क़रीब तीन महीने तक चुनाव चला था.
एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ दूसरे चरण के 27 फ़ीसदी उम्मीदवारों की संपत्ति एक करोड़ रुपए या उससे अधिक मूल्य की है. 11 फ़ीसदी उम्मीदवारों की संपत्ति 5 करोड़ रुपए या उससे अधिक की है.
वहीं, 07 फ़ीसदी ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन्होंने अपनी संपत्ति दो से पांच करोड़ रुपए के बीच की बताई है. 41 फ़ीसदी ऐसे भी उम्मीदवार हैं, जिनके पास 10 लाख रुपए से कम की संपत्ति है.
दलों की बात की जाए तो कांग्रेस के 53 में से 46 उम्मीदवार करोड़पति हैं. भाजपा के 51 में से 45 उम्मीदवार, डीएमके के 24 में से 23, एआईडीएमके के 22 में से 22 और बीएसपी के 80 में से 21 उम्मीदवारों ने ख़ुद को करोड़पति घोषित किया है.
लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के उम्मीदवारों की औसतन संपत्ति 3.90 करोड़ रुपए हैं.
इन सभी में तमिलनाडु के कन्याकुमारी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार वसंत कुमार सबसे अमीर हैं. इन्होंने 417 करोड़ से अधिक की संपत्ति घोषित की है.
सबसे अमीर उम्मीदवारों की सूची में दूसरे नंबर पर बिहार के पूर्णिया से कांग्रेस उम्मीदवार उदय सिंह हैं. इन्होंने 341 करोड़ रुपए से ज़्यादा की संपत्ति की घोषणा की है.
वहीं सूची में तीसरा नाम डीके सुरेश का है, जो कर्नाटक के बेंगलुरू ग्रामीण से कांग्रेस उम्मीदवार हैं. इनके पास 338 करोड़ से अधिक की संपत्ति है.
- एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक़ दूसरे चरण में 1644 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं.
- इनमें से 209 राष्ट्रीय दलों से, 107 क्षेत्रीय दलों से, 386 ग़ैर मान्यता प्राप्त दलों और 888 उम्मीदवार निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं.
- 251 उम्मीदवारों ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं.
- 697 उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता 5वीं से 12वीं के बीच की है. वहीं 756 उम्मीदवारों ने ख़ुद को ग्रेजुएट या उससे अधिक बताया है.
- 35 उम्मीदवार ने साक्षर और 26 उम्मीदवार ने ख़ुद को अनपढ़ बताया है.
- दूसरे चरण में महज़ 8 फ़ीसदी महिला उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, जिनकी कुल संख्या 120 है.फ़ेसबुक और ट्विटर पर यह एरियल फ़ोटोग्राफ़ प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी की पश्चिम बंगाल में हुई चुनावी जनसभा का बताकर शेयर किया जा
रहा है.
दक्षिणपंथी रुझान वाले सोशल मीडिया ग्रुप्स में कुछ लोगों ने यह दावा किया है कि ये तस्वीर पश्चिम बंगाल में 11 अप्रैल को हुई पहले चरण की वोटिंग से पहले का है.
अधिकांश सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस तस्वीर को पीएम मोदी की कूच बिहार में हुई चुनावी रैली का बताया है.
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पश्चिम बंगाल बीजेपी को राज्य की 42 में से कम से कम 23 सीटें जीतने का लक्ष्य दिया है.
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व अबकी बार पश्चिम बंगाल पर ख़ास ध्यान दे रहा है.
लेकिन वायरल फ़ोटो में भगवा रंग के कपड़े पहने लोगों को देखकर जो लोग इसे पीएम मोदी की रैली का बता रहे हैं, उनका दावा ग़लत है.
इस तस्वीर का भारतीय जनता पार्टी के किसी कार्यक्रम से कोई लेना-देना नहीं है.
'नरेंद्र मोदी 2019' नाम के पब्लिक ग्रुप में एक यूज़र ने लिखा है, "ये पश्चिम बंगाल में भाजपा की रैली का नज़ारा है. कूच बिहार की रैली. आज तो ममता बनर्जी की नींद गायब हो गयी होगी."
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